सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:31
قَدْ خَسِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِلِقَاءِ اللَّهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءَتْهُمُ السَّاعَةُ بَغْتَةً قَالُوا يَا حَسْرَتَنَا عَلَىٰ مَا فَرَّطْنَا فِيهَا وَهُمْ يَحْمِلُونَ أَوْزَارَهُمْ عَلَىٰ ظُهُورِهِمْ ۚ أَلَا سَاءَ مَا يَزِرُونَ
निश्चय वे क्षति में पड़ गये, जिन्होंने अल्लाह से मिलने को झुठला दिया, यहाँ तक कि जब प्रलय अचानक उनपर आ जायेगी तो कहेंगेः हाय! इस विषय में हमसे बड़ी चूक हुई और वे अपने पापों का बोझ अपनी पीठों पर उठाये होंगे। तो कैसा बुरा बोझ है, जिसे वे उठा रहे हैं।
तफ़सीर
निश्चय वे लोग घाटे में रहे, जिन्होंने क़ियामत के दिन दोबारा जीवित किए जाने को झुठलाया और अल्लाह के सामने खड़े होने को असंभव समझा, यहाँ तक कि जब बिना पूर्व ज्ञान के उनके पास अचानक क़ियामत आ पहुँचेगी, तो पछतावे की तीव्रता से कहेंगे : हाय हमारा अफसोस और हमारी निराशा! कि हमने अल्लाह के पक्ष में, उसके साथ कुफ़्र करके और क़ियामत के दिन के लिए तैयारी न करके, बड़ी कोताही की। और वे अपने पापों को अपनी पीठों पर उठाए होंगे। सुन लो! बहुत बुरा है, जो वे उन पापों का बोझ उठाएँगे।
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