सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:28
بَلْ بَدَا لَهُمْ مَا كَانُوا يُخْفُونَ مِنْ قَبْلُ ۖ وَلَوْ رُدُّوا لَعَادُوا لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
बल्कि उनके लिए वो बात खुल जायेगी, जिसे वे इससे पहले छुपा रहे थे[1] और यदि संसार में फेर दिये जायेँ, तो फिर वही करेंगे, जिससे रोके गये थे, वास्तव में, वे हैं ही झूठे।
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1. अर्थात जिस तथ्य को वह शपथ ले कर छुपा रहे थे कि हम मिश्रणवादी नहीं थे, उस समय खुल जायेगा। अथवा आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पहचानते हुये भी यह बात जो छुपा रहे थे, वह खुल जायेगी। अथवा द्विधावादियों के दिल का वह रोग खुल जायेगा, जिसे वह संसार में छुपा रहे थे। (तफ़्सीर इब्ने कसीर)
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1. अर्थात जिस तथ्य को वह शपथ ले कर छुपा रहे थे कि हम मिश्रणवादी नहीं थे, उस समय खुल जायेगा। अथवा आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पहचानते हुये भी यह बात जो छुपा रहे थे, वह खुल जायेगी। अथवा द्विधावादियों के दिल का वह रोग खुल जायेगा, जिसे वह संसार में छुपा रहे थे। (तफ़्सीर इब्ने कसीर)
तफ़सीर
बात ऐसी नहीं है जो उन्होंने कही है कि यदि उन्हें वापस भेज दिया जाए, तो वे अवश्य ईमान ले आएँगे, बल्कि उनके सामने वह स्पष्ट हो गया जो वे अपने कथन : (والله ربنا ما كنا مشركين) ''अल्लाह की क़सम! जो हमारा पालनहार है, हम मुश्रिक न थे।'' से छिपा रहे थे, जब उनके अंगों ने उनके खिलाफ़ गवाही दी। और यदि मान लिया जाए कि वे दुनिया में वापस लौट गए, तो निश्चय वे उसी कुफ़्र एवं शिर्क की ओर लौटेंगे, जिससे उन्हें रोका गया है और वे अपने इस वादे में झूठे हैं कि यदि वे वापस लौट गए तो ईमान लाएँगे।
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