सूरह 6 · जुज़ 8

Al-An'am · 6:153

وَأَنَّ هَٰذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيمًا فَاتَّبِعُوهُ ۖ وَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَنْ سَبِيلِهِ ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُمْ بِهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ

तथा (उसने बताया कि) ये (इस्लाम ही) अल्लाह की सीधी राह[1] है। अतः इसीपर चलो और दूसरी राहों पर न चलो, अन्यथा वह तुम्हें उसकी राह से दूर करके तित्तर-बित्तर कर देंगे। यही है, जिसका आदेश उसने तुम्हें दिया है, ताकि तुम उसके आज्ञाकारी रहो।
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1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक लकीर बनाई, और कहाः यह अल्लाह की राह है। फिर दायें-बायें कई लकीरें खीचीं और कहाः इन पर शैतान है जो इन की ओर बुलाता है और यही आयत पढ़ी। (मुस्नद अह़मदः431)

तफ़सीर

तथा उसने तुम्हारे लिए गुमराही के रास्तों पर चलना हराम ठहराया है। बल्कि, तुम्हें अल्लाह के सीधे मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है। गुमराही के रास्ते तुम्हें अलगाव और सत्य के मार्ग से दूरी की ओर ले जाते हैं। अल्लाह के सीधे मार्ग पर चलना ही है वह तथ्य है जिसकी अल्लाह ने तुम्हें ताकीद की है; ताकि तुम अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके एवं उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर, डरो।

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