सूरह 6 · जुज़ 8

Al-An'am · 6:150

قُلْ هَلُمَّ شُهَدَاءَكُمُ الَّذِينَ يَشْهَدُونَ أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَ هَٰذَا ۖ فَإِنْ شَهِدُوا فَلَا تَشْهَدْ مَعَهُمْ ۚ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ وَهُمْ بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ

आप कहिए कि अपने साक्षियों (गवाहों) को लाओ[1], जो साक्ष्य दें कि अल्लाह ने इसे ह़राम (अवैध) कर दिया है। फिर यदि वे साक्ष्य (गवाही) दें, तबभी आप उनके साथ होकर इसे न मानें तथा उनकी मनमानी पर न चलें, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठला दिया और परलोक पर ईमान (विश्वास) नहीं रखते तथा दूसरों को अपने पालनहार के बराबर करते हैं।
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1. ह़दीस में है कि सब से बड़ा पाप अल्लाह का साझी बनाना तथा माता-पिता के साथ बुरा व्यवहार करना और झूठी शपथ लेना है। (तिर्मिज़ीः3020, यह ह़दीस ह़सन है।)

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) इन मुश्रिकों से, जो अल्लाह के हलाल किए हुए को हराम करते हैं और दावा करते हैं कि अल्लाह ही ने इसे हराम किया है, कह दें : तुम अपने गवाहों को प्रस्तुत करो, जो यह गवाही दें कि अल्लाह ने इन वस्तुओं को हराम किया है, जिन्हें तुमने हराम ठहरा लिया है। यदि वे बिना ज्ञान के गवाही दें कि अल्लाह ने उन्हें हराम किया है, तो (ऐ रसूल!) आप उनकी गवाही में उनको सच्चा न मानें; क्योंकि यह झूठी गवाही है। तथा आप उन लोगों की इच्छाओं का पालन न करें, जो अपनी इच्छाओं को ही निर्णायक मानते हैं। क्योंकि उन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया है जब उन्होंने उस चीज़ को हराम ठहरा दिया जिसे अल्लाह ने उनके लिए हलाल किया था। तथा आप उनका अनुसरण न करें, जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते और वे अपने रब के साथ साझी बनाते हैं। चुनाँचे उसके अलावा को उसके बराबर (समकक्ष) ठहराते हैं। और जिसका अपने पालनहार के साथ यह रवैया हो उसका अनुसरण कैसे किया जा सकता है?!

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