सूरह 6 · जुज़ 7

Al-An'am · 6:12

قُلْ لِمَنْ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُلْ لِلَّهِ ۚ كَتَبَ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۚ لَيَجْمَعَنَّكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۚ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنْفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ

(हे नबी!) उनसे पूछिये कि जो कुछ आकाशों तथा धरती में है, वह किसका है? कहोः अल्लाह का है! उसने अपने ऊपर दया को अनिवार्य कर[1] लिया है, वह तुम्हें अवश्य प्रलय के दिन एकत्र[2] करेगा, जिसमें कोई संदेह नहीं। जिन्होंने अपने-आपको क्षति में डाल लिया, वही ईमान नहीं ला रहे हैं।
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1. अर्थात पूरे विश्व की व्यवस्था उस की दया का प्रमाण है। तथा अपनी दया के कारण ही विश्व में दण्ड नहीं दे रहा है। ह़दीस में है कि जब अल्लाह ने उत्पत्ति कर ली तो एक लेख लिखा, जो उस के पास उस के अर्श (सिंहासन) के ऊपर हैः "निश्चय मेरी दया मेरे क्रोध से बढ़ कर है।" (सह़ीह़ बुख़ारीः3194, मुस्लिमः2751) दूसरी ह़दीस में है कि अल्लाह के पास सौ दया हैं। उस में से एक को जिन्नों, इन्सानों तथा पशुओं और कीड़ों-मकूड़ों के लिये उतारा है। जिस से वह आपस में प्रेम तथा दया करते हैं, तथा निन्नान्वे दया अपने पास रख ली है। जिन से प्रलय के दिन अपने बन्दों (भक्तों) पर दया करेगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः6000, मुस्लिमः2752) 2. अर्थात कर्मों का फल देने के लिये।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) उनसे पूछिए : आकाशों तथा धरती की बादशाही और जो कुछ उन दोनों के बीच है, उसकी बादशाही किसकी है? आप कह दें : उन सब की बादशाही अल्लाह की है। उसने अपने बंदों पर अनुग्रह करते हुए अपने ऊपर दया करना लिख दिया है। इसलिए वह उन्हें यातना देने में जल्दी नहीं करता। यहाँ तक कि अगर उन्होंने तौबा नहीं की तो अल्लाह उन सभी को क़ियामत के दिन इकट्ठा करेगा, जिस दिन के बारे में कोई संदेह नहीं है। जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार कर अपने आपको घाटे में डाला, वे ईमान नहीं लाते हैं, कि ख़ुद को घाटे से बचा सकें।

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