सूरह 59 · जुज़ 28
Al-Hashr · 59:8
لِلْفُقَرَاءِ الْمُهَاجِرِينَ الَّذِينَ أُخْرِجُوا مِنْ دِيَارِهِمْ وَأَمْوَالِهِمْ يَبْتَغُونَ فَضْلًا مِنَ اللَّهِ وَرِضْوَانًا وَيَنْصُرُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الصَّادِقُونَ
उन निर्धन मुहाजिरों के लिए है, जो निकाल दिये गये अपने घरों तथा धनों से। वे चाहते हैं अल्लाह का अनुग्रह तथा प्रसन्नता और सहायता करते हैं अल्लाह तथा उसके रसूल की, यही सच्चे हैं।
तफ़सीर
इस धन का कुछ हिस्सा अल्लाह की ख़ातिर घर-बार छोड़ने वाले उन ग़रीबों पर खर्च किया जाएगा, जो अपने धनों और बाल-बच्चों को छोड़ने के लिए मजबूर किए गए। वे आशा करते हैं कि अल्लाह उन्हें इस दुनिया में जीविका और आख़िरत में अपनी प्रसन्नता प्रदान करेगा। वे अल्लाह के रास्ते में जिहाद करके अल्लाह की मदद तथा उसके रसूल की मदद करते हैं। जो इन गुणों से विशिष्ट हैं, वही लोग वास्तव में ईमान में दृढ़ हैं।
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