सूरह 59 · जुज़ 28

Al-Hashr · 59:5

مَا قَطَعْتُمْ مِنْ لِينَةٍ أَوْ تَرَكْتُمُوهَا قَائِمَةً عَلَىٰ أُصُولِهَا فَبِإِذْنِ اللَّهِ وَلِيُخْزِيَ الْفَاسِقِينَ

(हे मुसलमानो!) तुमने नहीं काटा[1] कोई खजूर का वृक्ष और न छोड़ा उसे खड़ा अपने तने पर, परन्तु ये सब अल्लाह के आदेश से हुआ और ताकि वह अपमानित करे पथभ्रष्टों को।
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1. बनी नज़ीर के घेराव के समय नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेशानुसार उन के खजूरों के कुछ वृक्ष जला दिये गये और काट दिये गये और कुछ छोड़ दिये गये। ताकि शत्रु की आड़ को समाप्त किया जाये। इस आयत में उसी का वर्णन किया गया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4884)

तफ़सीर

तुमने (ऐ मोमिनो के समुदाय) बनी नज़ीर के युद्ध के दौरान, अल्लाह के दुश्मनों को भड़काने के लिए जो भी खजूर के पेड़ काटे या जो पेड़ उनके तनों पर खड़े छोड़ दिए ताकि उनसे लाभ उठाओ, वह अल्लाह के आदेश से था। वह धरती में बिगाड़ पैदा करना नहीं था, जैसा कि उन्होंने दावा किया है। यह सब इसलिए हुआ ताकि अल्लाह अपनी अवज्ञा से निकल जाने वाले उन यहूदियों को अपमानित करे, जिन्होंने वचन तोड़ा और वफादारी के रास्ते को त्यागकर विश्वासघात का रास्ता चुना।

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