सूरह 59 · जुज़ 28

Al-Hashr · 59:16

كَمَثَلِ الشَّيْطَانِ إِذْ قَالَ لِلْإِنْسَانِ اكْفُرْ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ إِنِّي بَرِيءٌ مِنْكَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ رَبَّ الْعَالَمِينَ

(उनका उदाहरण) शैतान जैसा है कि वह कहता है मनुष्य से कि कुफ़्र कर, फिर जब वह काफ़िर हो गया, तो कह दिया कि मैं तुझसे विरक्त (अलग) हूँ। मैं तो डरता हूँ अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार से।

तफ़सीर

मुनाफ़िक़ों की बात सुनने के मामले में इन (यहूदियों) का उदाहरण शैतान की तरह है जब वह इनसान के लिए कुफ़्र करने को सुंदर बनाकर पेश करता है, फिर जब वह उसके लिए कुफ़्र को शोभित करने के कारण कुफ़्र कर बैठता है, तो कहता है : मैं तुम्हारे इस कुफ़्र करने से बरी हूँ। मैं प्राणियों के पालनहार अल्लाह से डरता हूँ।

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