सूरह 59 · जुज़ 28

Al-Hashr · 59:14

لَا يُقَاتِلُونَكُمْ جَمِيعًا إِلَّا فِي قُرًى مُحَصَّنَةٍ أَوْ مِنْ وَرَاءِ جُدُرٍ ۚ بَأْسُهُمْ بَيْنَهُمْ شَدِيدٌ ۚ تَحْسَبُهُمْ جَمِيعًا وَقُلُوبُهُمْ شَتَّىٰ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَا يَعْقِلُونَ

वे नहीं युध्द करेंगे तुमसे एकत्र होकर, परन्तु ये कि दुर्ग बंद बस्तियों में हों अथवा किसी दीवार की आड़ से। उनका युध्द आपस में बहुत कड़ा है। आप उन्हें एकत्र समझते हैं, जबकि उनके दिल अलग अलग हैं। ये इसलिए कि वे निर्बोध होते हैं।

तफ़सीर

यहूदी तुमसे (ऐ मोमिनो) इकट्ठे होकर युद्ध नहीं करेंगे, परंतु क़िलेबंद बस्तियों में या दीवारों के पीछे से। क्योंकि वे अपनी कायरता के कारण तुम्हारा सामना नहीं कर सकते। उनके बीच दुश्मनी के कारण उनकी आपस की लड़ाई बहुत सख़्त है। आप समझते हैं कि वे एकजुट हैं और उनके अंदर एकता है, जबकि सच्चाई यह है कि उनके दिल अलग-अलग हैं। यह विभेद और दुश्मनी इस कारण है कि वे बुद्धि नहीं रखते। क्योंकि यदि वे बुद्धि रखते, तो सत्य को जानते और उसका पालन करते और उसके बारे में विभेद न करते।

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