सूरह 57 · जुज़ 27
Al-Hadid · 57:23
لِكَيْلَا تَأْسَوْا عَلَىٰ مَا فَاتَكُمْ وَلَا تَفْرَحُوا بِمَا آتَاكُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ
ताकि तुम शोक न करो उसपर, जो तुमसे खो जाये और न इतराओ उसपर, जो तुम्हें प्रदान किया है और अल्लाह प्रेम नहीं करता किसी इतरान, गर्व करने वाले से।
तफ़सीर
और यह इसलिए ताकि (ऐ लोगो!) तुम उस चीज़ पर शोक न करो, जो तुमसे छूट जाए, तथा उन नेमतों पर फूल न जाओ, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान की हैं। निश्चय अल्लाह किसी अहंकार करने वाले, अल्लाह की दी हुई नेमतों पर लोगों के सामने गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता।
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