सूरह 57 · जुज़ 27
Al-Hadid · 57:12
يَوْمَ تَرَى الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ يَسْعَىٰ نُورُهُمْ بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَبِأَيْمَانِهِمْ بُشْرَاكُمُ الْيَوْمَ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
जिस दिन तुम देखोगे ईमान वालों तथा ईमान वालियों को कि दौड़ रहा[1] होगा उनका प्रकाश उनके आगे तथा उनके दायें। तुम्हें शुभ सूचना है ऐसे स्वर्गों की, बहती हैं जिनमें नहरें, जिनमें तुम सदावासी होगे, वही बड़ी सफलता है।
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1. यह प्रलय के दिन होगा जब वह अपने ईमान के प्रकाश में स्वर्ग तक पहुँचेंगे।
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1. यह प्रलय के दिन होगा जब वह अपने ईमान के प्रकाश में स्वर्ग तक पहुँचेंगे।
तफ़सीर
जिस दिन आप मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को देखेंगे कि उनका प्रकाश उनके आगे-आगे और उनके दाहिनी ओर चल रहा होगा। और उस दिन उनसे कहा जाएगा : आज तुम्हारे लिए ऐसे बाग़ों की खुशख़बरी है, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें तुम हमेशा रहने वाले हो। यही बदला तो बहुत बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं हो सकती।
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