सूरह 54 · जुज़ 27
Al-Qamar · 54:1
اقْتَرَبَتِ السَّاعَةُ وَانْشَقَّ الْقَمَرُ
समीप आ गयी[1] प्रलय तथा दो खण्ड हो गया चाँद।
____________________
1. आप (सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम) से मक्का वासियों ने माँग की कि आप कोई चमत्कार दिखायें। अतः आप ने चाँद को दो भाग होते उन्हें दिखा दिया। (बुख़ारीः 4867) आदरणीय अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद कहते हैं कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के युग में चाँद दो खण्ड हो गयाः एक खण्ड पर्वत के ऊपर और दूसरा उस के नीचे। और आप ने कहाः तुम सभी गवाह रहो। (सह़ीह़ बुख़ारीः4864)
____________________
1. आप (सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम) से मक्का वासियों ने माँग की कि आप कोई चमत्कार दिखायें। अतः आप ने चाँद को दो भाग होते उन्हें दिखा दिया। (बुख़ारीः 4867) आदरणीय अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद कहते हैं कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के युग में चाँद दो खण्ड हो गयाः एक खण्ड पर्वत के ऊपर और दूसरा उस के नीचे। और आप ने कहाः तुम सभी गवाह रहो। (सह़ीह़ बुख़ारीः4864)
तफ़सीर
क़ियामत का आगमन निकट आ गया और चाँद नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में फट गया। चाँद का फटना नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हिस्सी निशानियों (चमत्कारों) में से था (जिनका बोध ज्ञानेंद्रियों से किया जा सकता है)।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें