सूरह 52 · जुज़ 27
At-Tur · 52:32
أَمْ تَأْمُرُهُمْ أَحْلَامُهُمْ بِهَٰذَا ۚ أَمْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ
क्या उन्हें सिखाती हैं उनकी समझ ये बातें अथवा वह उल्लंघनकारी लोग हैं?
तफ़सीर
बल्कि, क्या उनकी बुद्धियाँ उन्हें यह कहने का आदेश देती हैं कि वह एक काहिन और एक पागल हैं?! चुनाँचे वे (आपके अंदर) ऐसी बातें जमा करते हैं, जो एक व्यक्ति के अंदर जमा नहीं हो सकतीं। बल्कि, दरअसल वे ऐसे लोग हैं जो सीमाओं को पार करने वाले हैं। इसलिए वे शरीयत या तर्क की ओर वापस नहीं आते हैं।
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