सूरह 50 · जुज़ 26
Qaf · 50:43
إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَإِلَيْنَا الْمَصِيرُ
वास्तव में, हम ही जीवन देते तथा मारते हैं और हमारी ओर ही फिरकर आना है।
तफ़सीर
निश्चय हम ही जीवन देते हैं और हम ही मारते हैं। हमारे सिवा न कोई जीवन देने वाला है और न मारने वाला है। और बंदों को क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए केवल हमारी ही ओर लौटकर आना है।
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