सूरह 50 · जुज़ 26
Qaf · 50:37
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِمَنْ كَانَ لَهُ قَلْبٌ أَوْ أَلْقَى السَّمْعَ وَهُوَ شَهِيدٌ
वास्तव में, इसमें निश्चय शिक्षा है उसके लिए, जिसके दिल हों अथवा कान धरे और वह उपस्थित[1] हो।
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1. अर्थात ध्यान से सुनता हो।
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1. अर्थात ध्यान से सुनता हो।
तफ़सीर
पिछले समुदायों के विनाश का जो यह उल्लेख किया गया है, निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए याद-दहानी और उपदेश है, जिसके पास समझने वाला दिल हो, या वह उसपर अपना कान लगाए इस हाल में कि उसका दिल उपस्थित हो, असावधान न हो।
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