सूरह 50 · जुज़ 26
Qaf · 50:1
ق ۚ وَالْقُرْآنِ الْمَجِيدِ
क़ाफ़। शपथ है आदरणीय क़ुर्आन की!
तफ़सीर
{क़ाफ़} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।। अल्लाह ने महान क़ुरआन की क़सम खाई है क्योंकि उसके अर्थ बहुत व्यापक तथा उसकी भलाइयाँ और बरकतें बहुत अधिक हैं; कि तुम क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए ज़रूर उठाए जाओगे।
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