सूरह 47 · जुज़ 26
Muhammad · 47:9
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَرِهُوا مَا أَنْزَلَ اللَّهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इसलिए कि उन्होंने बुरा माना उसे, जो अल्लाह ने उतारा और उसने उनके कर्म व्यर्थ कर[1] दिये।
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1. इस में इस ओर संकेत है कि बिना ईमान के अल्लाह के हाँ कोई सत्कर्म मान्य नहीं है।
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1. इस में इस ओर संकेत है कि बिना ईमान के अल्लाह के हाँ कोई सत्कर्म मान्य नहीं है।
तफ़सीर
उन्हें यह सज़ा इस कारण मिली कि उन्होंने उस क़ुरआन को नापसंद किया, जो अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारा, सिर्फ इस कारण कि उसमें अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) की शिक्षा है। तो अल्लाह ने उनके कार्यों को अकारथ कर दिया। इसलिए वे दुनिया और आखिरत दोनों जगह घाटे में रहे।
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