सूरह 47 · जुज़ 26
Muhammad · 47:38
هَا أَنْتُمْ هَٰؤُلَاءِ تُدْعَوْنَ لِتُنْفِقُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَمِنْكُمْ مَنْ يَبْخَلُ ۖ وَمَنْ يَبْخَلْ فَإِنَّمَا يَبْخَلُ عَنْ نَفْسِهِ ۚ وَاللَّهُ الْغَنِيُّ وَأَنْتُمُ الْفُقَرَاءُ ۚ وَإِنْ تَتَوَلَّوْا يَسْتَبْدِلْ قَوْمًا غَيْرَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُونُوا أَمْثَالَكُمْ
सुनो! तुम लोग हो, जिन्हें बुलाया जा रहा है, ताकि दान करो अल्लाह की राह में, तो तुममें से कुछ कंजूसी करने लगते हैं और जो कंजूसी करता[1] है, तो वह अपने आप ही से कंजूसी करता है और अल्लाह धनी है तथा तुम निर्धन हो और यदि तुम मूँह फेरोगे, तो वह तुम्हारे स्थान पर दूसरों को ले आयेगा फिर वे नहीं होंगे तुम्हारे जैसे।[1]
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1. अर्थात कंजूसी कर के अपने ही को हानि पहुँचाता है। 2. तो कंजूस नहीं होंगे। (देखियेः सूरह माइदा, आयतः 54)
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1. अर्थात कंजूसी कर के अपने ही को हानि पहुँचाता है। 2. तो कंजूस नहीं होंगे। (देखियेः सूरह माइदा, आयतः 54)
तफ़सीर
सुनो, तुम वे लोग हो कि तुम्हें कहा जाता है कि अपने धन का एक हिस्सा अल्लाह के रास्ते में खर्च करो, तुमसे अपना पूरा धन खर्च करने के लिए नहीं कहा जाता है, तो तुममें से कुछ लोग अपनी कंजूसी के कारण आवश्यक खर्च को रोक लेते हैं। और जो अपने धन का एक भाग अल्लाह के रास्ते में खर्च करने में कंजूसी करता है, तो वह वास्तव में ख़ुद पर कंजूसी करता है; क्योंकि वह अपने आपको खर्च करने के सवाब से वंचित कर देता है। अल्लाह तो बेनियाज़ है, उसे तुम्हारे खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। और तुम ही उसके मुहताज हो। और यदि तुम इस्लाम से कुफ़्र की ओर फिर जाओगे, तो वह तुम्हें नष्ट कर देगा और तुम्हारे अलावा अन्य लोगों को ले आएगा। फिर वे तुम्हारे जैसे नहीं होंगे। बल्कि वे उसके आज्ञाकारी होंगे।
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