सूरह 47 · जुज़ 26

Muhammad · 47:33

۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَلَا تُبْطِلُوا أَعْمَالَكُمْ

हे लोगो, जो ईमान लाये हो! आज्ञा मानो अल्लाह की तथा आज्ञा मानो[1] रसूल की तथा व्यर्थ न करो अपने कर्मों को।
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1. इस आयत में कहा गया है कि जिस प्रकार क़ुर्आन को मानना अनिवार्य है उसी प्रकार नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत (ह़दीसों) का पालन करना भी अनिवार्य है। ह़दीस में है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मेरी उम्मत स्वर्ग में जायेगी उस के सिवा जिस ने इन्कार किया। कहा गया कि कौन इन्कार करेगा, हे अल्लाह के रसूल? आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिस ने मेरी आज्ञकारी की तो वह स्वर्ग में जायेगा। और जिस ने मेरी आज्ञाकारी नहीं की तो उस ने इन्कार किया। (सह़ीह़ बुख़ारीः 7280)

तफ़सीर

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह का और उसके रसूल का आज्ञापालन करो। इस प्रकार कि उनके आदेशों का पालन करो और उनके निषेधों से बचो। तथा कुफ़्र और दिखावा आदि के द्वारा अपने कार्यों को व्यर्थ न करो।

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