सूरह 47 · जुज़ 26

Muhammad · 47:30

وَلَوْ نَشَاءُ لَأَرَيْنَاكَهُمْ فَلَعَرَفْتَهُمْ بِسِيمَاهُمْ ۚ وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ فِي لَحْنِ الْقَوْلِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ أَعْمَالَكُمْ

और (हे नबी!) यदि हम चाहें, तो दिखा दें आपको उन्हें, तो पहचान लेंगे आप उन्हें, उनके मुख से और आप अवश्य पहचान लेंगे उन्हें[1] (उनकी) बात के ढंग से तथा अल्लाह जानता है उनके कर्मों को।
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1. अर्थात उन के बात करने की रीति से।

तफ़सीर

और अगर हम (ऐ रसूल!) आपको मुनाफ़िक़ों की पहचान कराना चाहें, तो अवश्य आपको उनकी पहचान करा दें। फिर निश्चय आप उन्हें उनकी निशानियों से पहचान लेंगे, तथा आप उन्हें उनके बात करने की शैली से अवश्य पहचान लेंगे। तथा अल्लाह तुम्हारे कर्मों को जानता है। उससे उनमें से कुछ भी छिपा हुआ नहीं है, और वह तुम्हें उनका बदला देगा।

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