सूरह 47 · जुज़ 26
Muhammad · 47:18
فَهَلْ يَنْظُرُونَ إِلَّا السَّاعَةَ أَنْ تَأْتِيَهُمْ بَغْتَةً ۖ فَقَدْ جَاءَ أَشْرَاطُهَا ۚ فَأَنَّىٰ لَهُمْ إِذَا جَاءَتْهُمْ ذِكْرَاهُمْ
तो क्या वे प्रतीक्षा कर रहे हैं प्रलय ही की कि आ जाये उनके पास सहसा? तो आ चुके हैं उसके लक्षण।[1] फिर कहाँ होगा उनके शिक्षा लेने का समय, जब वह (क़्यामत) आ जायेगी उनके पास?
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1. आयत में कहा गया है कि प्रलय के लक्षण आ चुके हैं। और उन में सब से बड़ा लक्षण आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का आगमन है। जैसा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन है कि आप ने फ़रमायाः "मेरा आगमन तथा प्रलय इन दो उंग्लियों के समान है।" (सह़ीह़ बुख़ारीः 4936) अर्थात बहुत समीप है। जिस का अर्थ यह है कि जिस प्रकार दो उंग्लियों के बीच कोई तीसरी उंगली नहीं इसी प्रकार मेरे और प्रलय के बीच कोई नबी नहीं। मेरे आगमन के पश्चात् अब प्रलय ही आयेगी।
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1. आयत में कहा गया है कि प्रलय के लक्षण आ चुके हैं। और उन में सब से बड़ा लक्षण आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का आगमन है। जैसा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन है कि आप ने फ़रमायाः "मेरा आगमन तथा प्रलय इन दो उंग्लियों के समान है।" (सह़ीह़ बुख़ारीः 4936) अर्थात बहुत समीप है। जिस का अर्थ यह है कि जिस प्रकार दो उंग्लियों के बीच कोई तीसरी उंगली नहीं इसी प्रकार मेरे और प्रलय के बीच कोई नबी नहीं। मेरे आगमन के पश्चात् अब प्रलय ही आयेगी।
तफ़सीर
तो क्या काफ़िर लोग यही प्रतीक्षा कर रहे हैं कि क़ियामत उनपर उनकी पूर्व जानकारी के बिना अचानक आ जाए?! निश्चय उसकी निशानियाँ तो आ ही चुकी हैं। जैसे कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का नबी बनकर आना और चंद्रमा का दो टुकड़े होना। फिर जब क़ियामत उनके पास आ गई, तो उनके लिए उपदेश ग्रहण करना कैसे संभव होगा?
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