सूरह 46 · जुज़ 26

Al-Ahqaf · 46:32

وَمَنْ لَا يُجِبْ دَاعِيَ اللَّهِ فَلَيْسَ بِمُعْجِزٍ فِي الْأَرْضِ وَلَيْسَ لَهُ مِنْ دُونِهِ أَوْلِيَاءُ ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ مُبِينٍ

तथा जो मानेगा नहीं अल्लाह की ओर बुलाने वाले की बात, तो नहीं है वह विवश करने वाला धरती में और नहीं है उसके लिए अल्लाह के अतिरिक्त कोई सहायक। यही लोग खुले कुपथ में हैं।

तफ़सीर

और जो उस सत्य को नहीं मानेगा, जिसकी ओर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बुला रहे हैं, वह धरती में कहीं भागकर अल्लाह के वश से निकल नहीं सकता। और अल्लाह के सिवा उसके कोई सहायक नहीं होंगे, जो उसे यातना से बचा सकें। ये लोग स्पष्ट रूप से सत्य से भटके हुए हैं।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें

Al-Ahqaf 46:32 · Tlawati