सूरह 44 · जुज़ 25
Ad-Dukhan · 44:56
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا الْمَوْتَ إِلَّا الْمَوْتَةَ الْأُولَىٰ ۖ وَوَقَاهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
वे उस स्वर्ग में मौत[1] नहीं चखेंगे, प्रथम (सांसारिक) मौत के सिवा तथा (अल्लाह) बचा लेगा उन्हें, नरक की यातना से।
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1. ह़दीस में है कि जब स्वर्गी स्वर्ग में और नारकी नरक में चले जायेंगे तो मौत को स्वर्ग और नरक के बीच ला कर वध कर दिया जायेगा। और एलान कर दिया जायेगा कि अब मौत नहीं होगी। जिस से स्वर्गी प्रसन्न हो जायेंगे और नारकियों को शोक पर शोक हो जायेगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6548, सह़ीह़ मुस्लिमः2850)
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1. ह़दीस में है कि जब स्वर्गी स्वर्ग में और नारकी नरक में चले जायेंगे तो मौत को स्वर्ग और नरक के बीच ला कर वध कर दिया जायेगा। और एलान कर दिया जायेगा कि अब मौत नहीं होगी। जिस से स्वर्गी प्रसन्न हो जायेंगे और नारकियों को शोक पर शोक हो जायेगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6548, सह़ीह़ मुस्लिमः2850)
तफ़सीर
उसी में सदैव रहेंगे। वे दुनिया के जीवन में होने वाली पहली मौत के सिवा, उसमें मौत का स्वाद नहीं चखेंगे। तथा उनका पालनहार उन्हें जहन्नम की यातना से सुरक्षित रखेगा।
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