सूरह 44 · जुज़ 25
Ad-Dukhan · 44:29
فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنْظَرِينَ
तो नहीं रोया उनपर आकाश और न धरती और न उन्हें अवसर (समय) दिया गया।
तफ़सीर
जब फ़िरऔन तथा उसकी जाति के लोग डूब गए, तो उनपर न तो आकाश और धरती ने विलाप किया और न उन्हें तौबा करने की मोहलत दी गई।
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