सूरह 40 · जुज़ 24
Ghafir · 40:32
وَيَا قَوْمِ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ يَوْمَ التَّنَادِ
तथा हे मेरी जाति! मैं डर रहा हूँ तुमपर, एक-दूसरे को पुकारने के दिन[1] से।
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1. अर्थात प्रलय के दिन से जब भय के कारण एक-दूसरे को पुकारेंगे।
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1. अर्थात प्रलय के दिन से जब भय के कारण एक-दूसरे को पुकारेंगे।
तफ़सीर
ऐ मेरी जाति के लोगो! मुझे तुम्हारे विषय में क़ियामत के दिन का भय है, जिस दिन लोग, एक-दूसरे को, रिश्तों-नातों और पद-प्रतिष्ठाओं के आधार पर पुकारेंगे, यह समझकर कि इस भयावह परिस्थिति में शायद इससे कुछ लाभ हो जाए।
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