सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:94
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا ضَرَبْتُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَتَبَيَّنُوا وَلَا تَقُولُوا لِمَنْ أَلْقَىٰ إِلَيْكُمُ السَّلَامَ لَسْتَ مُؤْمِنًا تَبْتَغُونَ عَرَضَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا فَعِنْدَ اللَّهِ مَغَانِمُ كَثِيرَةٌ ۚ كَذَٰلِكَ كُنْتُمْ مِنْ قَبْلُ فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْكُمْ فَتَبَيَّنُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
हे ईमान वालो! जब तुम अल्लाह की राह में (जिहाद के लिए) निकलो, तो भली-भाँति परख[1] लो और कोई तुम्हें सलाम[2] करे, तो ये न कहो कि तुम ईमान वाले नहीं हो। क्या तुम सांसारिक जीवन का उपकरण चाहते हो? जबकि अल्लाह के पास बहुत-से परिहार (शत्रुधन) हैं। तुमभी पहले ऐसे[3] ही थे, तो अल्लाह ने तुमपर उपकार किया। अतः, भली-भाँति परख लिया करो। निःसंदेह, अल्लाह उससे सूचित है, जो तुम कर रहे हो।
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1. अर्थात यह कि वह शत्रु हैं या मित्र हैं। 2. सलाम करना मुसलमान होने का एक लक्षण है। 3. अर्थात इस्लाम के शब्द के सिवा तुम्हारे पास इस्लाम का कोई चिन्ह नहीं था। इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि रात के समय एक व्यक्ति यात्रा कर रहा था। जब उस से कुछ मुसलमान मिले तो उस ने अस्सलामु अलैकुम कहा। फिर भी एक मुसलमान ने उसे झूठा समझ कर मार दिया। इसी पर यह आयत उतरी। जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस का पता चला तो आप बहुत नाराज़ हुये। (इब्ने कसीर)
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1. अर्थात यह कि वह शत्रु हैं या मित्र हैं। 2. सलाम करना मुसलमान होने का एक लक्षण है। 3. अर्थात इस्लाम के शब्द के सिवा तुम्हारे पास इस्लाम का कोई चिन्ह नहीं था। इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि रात के समय एक व्यक्ति यात्रा कर रहा था। जब उस से कुछ मुसलमान मिले तो उस ने अस्सलामु अलैकुम कहा। फिर भी एक मुसलमान ने उसे झूठा समझ कर मार दिया। इसी पर यह आयत उतरी। जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस का पता चला तो आप बहुत नाराज़ हुये। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जब तुम अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए निकलो, तो छानबीन कर लिया करो कि किससे युद्ध कर रहे हो और जो तुम्हें अपने मुसलमान होने का सबूत दिखाए, उसे यह न कहो कि तुम मोमिन नहीं हो, बल्कि तुम केवल अपनी जान एवं माल की रक्षा के लिए मुसलमान होने का प्रदर्शन कर रहे हो। फिर तुम ग़नीमत के धन जैसे दुनिया के तुच्छ सामानों के लोभ में उसकी हत्या कर दो! सुनो, अल्लाह के पास बहुत-सी ग़नीमतें हैं, जो इससे बेहतर और बड़ी हैं। इससे पहले तुम भी इसी व्यक्ति की तरह थे, जो अपनी क़ौम से अपना ईमान छिपा रहा है। फिर अल्लाह ने इस्लाम की दौलत प्रदानकर तुमपर उपकार किया और तुम्हारे रक्त की रक्षा की। इसलिए छानबीन कर लिया करो। यक़ीनन अल्लाह से तुम्हारा कोई छोटे से छोटा कार्य भी छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
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