सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:78
أَيْنَمَا تَكُونُوا يُدْرِكْكُمُ الْمَوْتُ وَلَوْ كُنْتُمْ فِي بُرُوجٍ مُشَيَّدَةٍ ۗ وَإِنْ تُصِبْهُمْ حَسَنَةٌ يَقُولُوا هَٰذِهِ مِنْ عِنْدِ اللَّهِ ۖ وَإِنْ تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ يَقُولُوا هَٰذِهِ مِنْ عِنْدِكَ ۚ قُلْ كُلٌّ مِنْ عِنْدِ اللَّهِ ۖ فَمَالِ هَٰؤُلَاءِ الْقَوْمِ لَا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ حَدِيثًا
तुम जहाँ भी रहो, तुम्हें मौत आ पकड़ेगी, यद्यपि दृढ़ दुर्गों में क्यों न रहो। तथा उन्हें यदि कोई सुख पहुँचता है, तो कहते हैं कि ये अल्लाह की ओर से है और यदि कोई आपदा आ पड़े, तो कहते हैं कि ये आपके कारण है। (हे नबी!) उनसे कह दो कि सब अल्लाह की ओर से है। इन लोगों को क्या हो गया कि कोई बात समझने के समीप भी नहीं[1] होते?
____________________
1. भावार्थ यह है कि जब मुसलमानों को कोई हानि हो जाती, तो मुनाफ़िक़ (द्विधावादी) तथा यहूदी कहतेः यह सब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कारण हुआ। क़ुर्आन कहता है कि सब कुछ अल्लाह की ओर से होता है। अर्थात उस ने प्रत्येक दशा तथा परिणाम के लिये कुछ नियम बना दिये हैं। और जो कुछ भी होता है, वह उन्हीं दशाओं का परिणाम होता है। अतः तुम्हारी यह बातें जो कह रहे हो, बड़ी अज्ञानता की बातें हैं।
____________________
1. भावार्थ यह है कि जब मुसलमानों को कोई हानि हो जाती, तो मुनाफ़िक़ (द्विधावादी) तथा यहूदी कहतेः यह सब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कारण हुआ। क़ुर्आन कहता है कि सब कुछ अल्लाह की ओर से होता है। अर्थात उस ने प्रत्येक दशा तथा परिणाम के लिये कुछ नियम बना दिये हैं। और जो कुछ भी होता है, वह उन्हीं दशाओं का परिणाम होता है। अतः तुम्हारी यह बातें जो कह रहे हो, बड़ी अज्ञानता की बातें हैं।
तफ़सीर
तुम जहाँ कहीं भी हो, तुम्हारा समय आने पर मृत्यु तुमको पा लेगी, भले ही तुम युद्ध के मैदान से दूर अभेद्य महलों में हो। इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) का हाल यह है कि यदि इन्हें संतान और ढेर सारी आजीविका जैसी कोई खुशी की चीज़ मिलती है, तो कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से है। लेकिन यदि इन्हें संतान या आजीविका में कठोर स्थिति का सामना होता है, तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अपशकुन लेते हैं और कहते हैं कि यह बुराई आपके कारण है। (ऐ रसूल!) इनका खंडन करते हुए कह दें : भलाइयाँ और बुराइयाँ, सब अल्लाह के फ़ैसले और उसकी तक़दीर के अधीन हैं। तो इस तरह की बात कहने वालों को क्या हो गया है कि वे समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आप उनसे क्या कह रहे हैं?!
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें