सूरह 4 · जुज़ 5

An-Nisa · 4:75

وَمَا لَكُمْ لَا تُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ الرِّجَالِ وَالنِّسَاءِ وَالْوِلْدَانِ الَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا أَخْرِجْنَا مِنْ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ الظَّالِمِ أَهْلُهَا وَاجْعَلْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ وَلِيًّا وَاجْعَلْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ نَصِيرًا

और तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह की राह में युध्द नहीं करते, जबकि कितने ही निर्बल पुरुष, स्त्रियाँ और बच्चे हैं, जो गुहार रहे हैं कि हे हमारे पालनहार! हमें इस नगर[1] से निकाल दे, जिसके निवासी अत्याचारी हैं और हमारे लिए अपनी ओर से कोई रक्षक बना दे और हमारे लिए अपनी ओर से कोई सहायक बना दे।
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1. अर्थात मक्का नगर से। यहाँ इस तथ्य को उजागर कर दिया गया है कि क़ुर्आन ने युध्द का आदेश इस लिये नहीं दिया है कि दूसरों पर अत्याचार किया जाये। बल्कि नृशंसितों तथा निर्बलों की सहायता के लिये दिया है। इसी लिये वह बार बार कहता है कि "अल्लाह की राह में युध्द करो", अपने स्वार्थ और मनोकांक्षाओं के लिये नहीं। न्याय तथा सत्य की स्थापना और सुरक्षा के लिये युध्द करो।

तफ़सीर

- ऐ मोमिनो! - तुम्हें अल्लाह के रास्ते में, उसके धर्म को ऊँचा करने और बेसहारा पुरुषों, स्त्रियों तथा बच्चों को मुक्ति दिलाने के लिए जिहाद करने से कौन-सी चीज़ रोकती है, जो बेबसी के आलम में अल्लाह से दुआ कर रहें हैं कि ऐ हमारे पालनहार! हमें मक्का से निकाल दे, क्योंकि उसके वासी अल्लाह का साझी बनाकर और उसके बंदों को उत्पीड़ित करके अत्याचार करते हैं। तथा हमारे लिए अपनी ओर से कोई संरक्षक बना दे, जो हमारी देखभाल और संरक्षण करे और ऐसा सहायक बना दे, जो हमसे हर प्रकार की हानि को दूर कर दे।

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