सूरह 4 · जुज़ 5

An-Nisa · 4:35

وَإِنْ خِفْتُمْ شِقَاقَ بَيْنِهِمَا فَابْعَثُوا حَكَمًا مِنْ أَهْلِهِ وَحَكَمًا مِنْ أَهْلِهَا إِنْ يُرِيدَا إِصْلَاحًا يُوَفِّقِ اللَّهُ بَيْنَهُمَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا خَبِيرًا

और यदि तुम्हें[1] दोनों के बीच वियोग का डर हो, तो एक मध्यस्त उस (पति) के घराने से तथा एक मध्यस्त उस (पत्नी) के घराने से नियुक्त करो, यदि वे दोनों संधि कराना चाहेंगे, तो अल्लाह उन दोनों[2] के बीच संधि करा देगा। वास्तव में, अल्लाह अति ज्ञानी सर्वसूचित है।
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1. इस में पति-पत्नी के संरक्षकों को संबोधित किया गया है। 2. अर्थात पति पत्नी में।

तफ़सीर

यदि तुम्हें - ऐ पति-पत्नी के अभिभावको! - इस बात का भय हो कि दोनों के बीच का विवाद दुश्मनी और परस्पर संबंध-विच्छेद की सीमा तक पहुँच जाएगा, तो पति के परिवार से एक न्यायी पुरुष और पत्नी के परिवार से एक न्यायी पुरुष को भेजो; ताकि वे दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके बीच जुदाई अथवा मिलाप का निर्णय करें।जबकि मेलमिलाप ही ज़्यादा प्रिय और बेहतर है। यदि दोनों मध्यस्थों ने मेलमिलाप चाहा और उसके लिए बेहतरीन प्रयास किए, तो अल्लाह पति-पत्नी के बीच मिलाप पैदा कर देगा और उनके बीच का विवाद समाप्त हो जाएगा। अल्लाह पर उसके बंदों की कोई बात छिपी नहीं है और वह उनके दिलों के निहित भेदों से भी अवगत है।

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