सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:33
وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِيَ مِمَّا تَرَكَ الْوَالِدَانِ وَالْأَقْرَبُونَ ۚ وَالَّذِينَ عَقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ فَآتُوهُمْ نَصِيبَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدًا
और हमने प्रत्येक के लिए वारिस (उत्तराधिकारी) बना दिये हैं, उसमें से जो माता-पिता तथा समीपवर्तियों ने छोड़ा हो तथा जिनसे तुमने समझौता[1] किया हो, उन्हें उनका भाग दो। वास्तव में, अल्लाह प्रत्येक चीज़ से सूचित है।
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1. यह संधिभ मीरास इस्लाम के आरंभिक युग में थी, जिसे (मवारीस की आयत से) निरस्त कर दिया गया। (इब्ने कसीर)
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1. यह संधिभ मीरास इस्लाम के आरंभिक युग में थी, जिसे (मवारीस की आयत से) निरस्त कर दिया गया। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
हमने तुममें से हर एक के हक़दार बना दिए हैं, जो माता-पिता और निकटवर्ती रिश्तेदारों की छोड़ी हुई संपत्ति के वारिस होंगे। रही बात उनकी जिनसे तुमने क़समें खाकर आपसी एकता एवं सहोग का मुआहदा कर रखा है, तो उन्हें मीरास से उनका हिस्सा दो। बेशक अल्लाह हर वस्तु से सूचित है, और इसी में उसका तुम्हारी इन क़समों और वचनों से अवगत होना भी शामिल है। आपसी एकता एवं सहोग के मुआहदा के द्वारा विरासत का नियम शुरू इस्लाम में थे, फिर उसे निरस्त कर दिया गया।
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