सूरह 4 · जुज़ 4
An-Nisa · 4:22
وَلَا تَنْكِحُوا مَا نَكَحَ آبَاؤُكُمْ مِنَ النِّسَاءِ إِلَّا مَا قَدْ سَلَفَ ۚ إِنَّهُ كَانَ فَاحِشَةً وَمَقْتًا وَسَاءَ سَبِيلًا
और उन स्त्रियों से विवाह[1] न करो, जिनसे तुम्हारे पिताओं ने विवाह किया हो, परन्तु जो पहले हो चुका[2]। वास्तव में, ये निर्लज्जा की तथा अप्रिय बात और बुरी रीति थी।
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1. जैसा कि इस्लाम से पहले लोग किया करते थे। और हो सकता है कि आज भी संसार के किसी कोने में ऐसा होता हो। परन्तु यदि भोग करने से पहले बाप ने तलाक़ दे दी हो तो उस स्त्री से विवाह किया जा सकता है। 2. अर्थात इस आदेश के आने से पहले जो कुछ हो गया अल्लाह उसे क्षमा करने वाला है।
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1. जैसा कि इस्लाम से पहले लोग किया करते थे। और हो सकता है कि आज भी संसार के किसी कोने में ऐसा होता हो। परन्तु यदि भोग करने से पहले बाप ने तलाक़ दे दी हो तो उस स्त्री से विवाह किया जा सकता है। 2. अर्थात इस आदेश के आने से पहले जो कुछ हो गया अल्लाह उसे क्षमा करने वाला है।
तफ़सीर
और तुम उन स्त्रियों से निकाह न करो, जिनसे तुम्हारे पिताओं ने निकाह किया है, क्योंकि यह हराम (निषिद्ध) है। परंतु जो इस्लाम से पहले ऐसा हो चुका है, उसपर कोई पकड़ नहीं है। इसके हराम होने का कारण यह है कि बेटों का अपने पिताओं की पत्नियों से विवाह करना अत्यन्त घृणित बात है तथा ऐसा करने वाले पर अल्लाह के क्रोध का कारण है और यह चलने का एक बुरा रास्ता है।
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