सूरह 4 · जुज़ 6

An-Nisa · 4:157

وَقَوْلِهِمْ إِنَّا قَتَلْنَا الْمَسِيحَ عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ اللَّهِ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلَٰكِنْ شُبِّهَ لَهُمْ ۚ وَإِنَّ الَّذِينَ اخْتَلَفُوا فِيهِ لَفِي شَكٍّ مِنْهُ ۚ مَا لَهُمْ بِهِ مِنْ عِلْمٍ إِلَّا اتِّبَاعَ الظَّنِّ ۚ وَمَا قَتَلُوهُ يَقِينًا

तथा उनके (गर्व से) कहने के कारण कि हमने अल्लाह के रसूल, मर्यम के पुत्र, ईसा मसीह़ को वध कर दिया, जबकि (वास्तव में) उसे वध नहीं किया और न सलीब (फाँसी) दी, परन्तु उनके लिए (इसे) संदिग्ध कर दिया गया। निःसंदेह, जिन लोगों ने इसमें विभेद किया, वे भी शंका में पड़े हुए हैं और उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं, केवल अनुमान के पीछे पड़े हुए हैं और निश्चय उसे उन्होंने वध नहीं किया है।

तफ़सीर

तथा हमने उनपर उनके गर्व करते हुए झूठमूठ यह कहने के कारण लानत भेजी : निःसंदेह हमने ही अल्लाह के रसूल मरयम के पुत्र ईसा मसीह को क़त्ल किया। हालाँकि न तो उन्होंने उन्हें क़त्ल किया, जैसा कि उनका दावा है, और न ही उन्हें सूली पर चढ़ाया। बल्कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को क़त्ल किया, जिसे अल्लाह ने ईसा - अलैहिस्सलाम - का सदृश बना दिया था और उसे सूली पर चढ़ाया। इसलिए उन्होंने सोचा कि क़त्ल होने वाला ईसा अलैहिस्सलाम ही थे। जिन यहूदियों ने ईसा अलैहिस्सलाम की हत्या का दावा किया और जिन ईसाइयों ने उन्हें यहूदियों के हवाले किया, दोनों ही उनके मामले में भ्रम और संदेह में हैं। क्योंकि उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं है। वे केवल अनुमान का पालन करते हैं और अनुमान से सच्चाई का कुछ भी लाभ नहीं होता है। उन्होंने निश्चित रूप से ईसा अलैहिस्सलाम को न तो क़त्ल किया और न उन्हें सूली पर चढ़ाया।

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