सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:130
وَإِنْ يَتَفَرَّقَا يُغْنِ اللَّهُ كُلًّا مِنْ سَعَتِهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ وَاسِعًا حَكِيمًا
और यदि दोनों अलग हो जायें, तो अल्लाह प्रत्येक को अपनी दया से (दूसरे से) निश्चिंत[1] कर देगा और अल्लाह बड़ा उदार तत्वज्ञ है।
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1. अर्थात यदि निभाव न हो सके तो विवाह बंधन में रहना आवश्यक नहीं। दोनों अलग हो जायें, अल्लाह दोनों के लिये पति तथा पत्नी की व्यवस्था बना देगा।
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1. अर्थात यदि निभाव न हो सके तो विवाह बंधन में रहना आवश्यक नहीं। दोनों अलग हो जायें, अल्लाह दोनों के लिये पति तथा पत्नी की व्यवस्था बना देगा।
तफ़सीर
यदि तलाक़ या ख़ुलअ के द्वारा पति-पत्नी एक दूसरे से अलग हो जाएँ, तो अल्लाह उनमें से प्रत्येक को अपने व्यापक अनुग्रह से समृद्ध कर देगा। अल्लाह व्यापक अनुग्रह एवं दया वाला, तथा अपने प्रबंधन और तक़दीर (नियति) में हिकमत वाला है।
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