सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:127
وَيَسْتَفْتُونَكَ فِي النِّسَاءِ ۖ قُلِ اللَّهُ يُفْتِيكُمْ فِيهِنَّ وَمَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فِي الْكِتَابِ فِي يَتَامَى النِّسَاءِ اللَّاتِي لَا تُؤْتُونَهُنَّ مَا كُتِبَ لَهُنَّ وَتَرْغَبُونَ أَنْ تَنْكِحُوهُنَّ وَالْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ الْوِلْدَانِ وَأَنْ تَقُومُوا لِلْيَتَامَىٰ بِالْقِسْطِ ۚ وَمَا تَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ بِهِ عَلِيمًا
(हे नबी!) वे स्त्रियों के बारे में आपसे धर्मादेश पूछ रहे हैं। आप कह दें कि अल्लाह उनके बारे में तुम्हें आदेश देता है और वे आदेश भी हैं, जो इससे पूर्व पुस्तक (क़ुर्आन) में तुम्हें, उन अनाथ स्त्रियों के बारे में सुनाये गये हैं, जिनके निर्धारित अधिकार तुम नहीं देते और उनसे विवाह करने की रुची रखते हो तथा उन बच्चों के बारे में भी, जो निर्बल हैं तथा (ये भी आदेश देता है कि) अनाथों के लिए न्याय पर स्थिर रहो[1] तथा तुम जो भी भलाई करते हो, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है।
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1. इस्लाम से पहले यदि अनाथ स्त्री सुन्दर होती तो उस का संरक्षक, यदि उस का विवाह उस से हो सकता हो, तो उस से विवाह कर लेता परन्तु उसे महर (विवाह उपहार) नहीं देता। और यदि सुन्दर नहीं हो तो दूसरे से उसे विवाह नहीं करने देता था। ताकि उस का धन उसी के पास रह जाये। इसी प्रकार अनाथ बच्चों के साथ भी अत्याचार और अन्याय किया जाता था, जिन से रोकने के लिये यह आयत उतरी। (इब्ने कसीर)
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1. इस्लाम से पहले यदि अनाथ स्त्री सुन्दर होती तो उस का संरक्षक, यदि उस का विवाह उस से हो सकता हो, तो उस से विवाह कर लेता परन्तु उसे महर (विवाह उपहार) नहीं देता। और यदि सुन्दर नहीं हो तो दूसरे से उसे विवाह नहीं करने देता था। ताकि उस का धन उसी के पास रह जाये। इसी प्रकार अनाथ बच्चों के साथ भी अत्याचार और अन्याय किया जाता था, जिन से रोकने के लिये यह आयत उतरी। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
- ऐ रसूल - लोग आपसे स्त्रियों के मामले में तथा उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में पूछते हैं। आप उनसे कह दें : अल्लाह तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर देता है और तुम्हारे लिए कुरआन की वह आयतें भी बयान करता हैं, जो उन अनाथ स्त्रियों के विषय में तुम्हें पढ़कर सुनाई जाती हैं जो तुम्हारी अभिभावकता के अंतर्गत होती हैं और तुम उन्हें अल्लाह की ओर से उनके लिए निर्धारित किए गए महर या विरासत से वंचित रखते हो। तुम स्वयं उनसे शादी नहीं करना चाहते और उनके धन के लालच में उन्हें शादी करने से भी रोकते हो। वह तुम्हारे लिए कमज़ोर बच्चों के अधिकारों को भी स्पष्ट करता है कि उन्हें विरासत में उनका अधिकार दो और उनके धन पर क़ब्ज़ा जमाकर उन पर अत्याचार न करो। तथा तुम्हारे लिए यह दायित्व भी बयान करता है कि अनाथों के मामलों का न्याय के साथ इस तरह प्रबंधन करो, जिससे दुनिया एवं आख़िरत में उनका भला हो। तुम अनाथों और अन्य लोगों के लिए जो भी अच्छा करोगे, अल्लाह उससे अवगत है और तुम्हें उसका बदला देगा।
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