सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:107
وَلَا تُجَادِلْ عَنِ الَّذِينَ يَخْتَانُونَ أَنْفُسَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ مَنْ كَانَ خَوَّانًا أَثِيمًا
और उनका पक्ष न लें, जो स्वयं अपने साथ विश्वासघात करते हों, निःसंदेह अल्लाह विश्वासघाती, पापी से प्रेम नहीं करता[1]।
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1. आयत का भावार्थ यह है कि न्यायधीश को ऐसी बात नहीं करनी चाहिये, जिस में किसी का पक्षपात हो।
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1. आयत का भावार्थ यह है कि न्यायधीश को ऐसी बात नहीं करनी चाहिये, जिस में किसी का पक्षपात हो।
तफ़सीर
आप किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष न लें, जो विश्वासघात करता है और अपने विश्वासघात को छिपाने में अतिशयोक्ति करता है। और अल्लाह ऐसे व्यक्ति को पसंद नहीं करता जो बहुत विश्वासघात और पाप करने वाला है।
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