सूरह 39 · जुज़ 24

Az-Zumar · 39:71

وَسِيقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًا ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوهَا فُتِحَتْ أَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَا أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِنْكُمْ يَتْلُونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِ رَبِّكُمْ وَيُنْذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا بَلَىٰ وَلَٰكِنْ حَقَّتْ كَلِمَةُ الْعَذَابِ عَلَى الْكَافِرِينَ

तथा हाँके जायेंगे, जो काफ़िर हो गये नरक की ओर, झुण्ड बनाकर। यहाँतक कि जब वे उसके पास आयेंगे, तो खोल दिये जायेंगे उसके द्वार तथा उनसे कहेंगे उसके रक्षक (फ़रिश्तेः) क्या नहीं आये तुम्हारे पास रसूल तुममें से, जो तुम्हें सुनाते, तुम्हारे पालनहार की आयतें तथा सचेत करते तुम्हें, इस दिन का सामना करने से? वे कहेंगेः क्यों नहीं? परन्तु, सिध्द हो गया यातना का शब्द, काफ़िरों पर।

तफ़सीर

तथा फ़रिश्ते, अल्लाह का इनकार करने वाले लोगों को अपमानित गिरोहों की शक्ल में जहन्नम की ओर हाँककर ले जाएँगे। यहाँ तक कि जब वे जहन्नम के पास पहुँच जाएँगे, तो उसके रक्षक के तौर पर नियुक्त फ़रिश्ते उसके द्वार खोल देंगे और उन्हें यह कहकर डाँटते हुए उनका स्वागत करेंगेः क्या तुम्हारे पास, तुम्हारे ही जैसे रसूल नहीं आए, जो तुम्हें तुम्हारे पालनहार की आयतें सुनाते तथा क़ियामत के दिन के सामना करने और उसकी यातना से डराते? तो काफ़िर लोग अपने गुनाह का इकरार करते हुए कहेंगेः क्यों नहीं?! आए तो थे। लेकिन काफ़िरों के हक में यातना की बात सिद्ध हो चुकी थी और हम काफ़िर थे।

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