सूरह 39 · जुज़ 24
Az-Zumar · 39:67
وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ وَالْأَرْضُ جَمِيعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَالسَّمَاوَاتُ مَطْوِيَّاتٌ بِيَمِينِهِ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
तथा उन्होंने अल्लाह का सम्मान नहीं किया, जैसे उसका सम्मान करना चाहिये था और धरती पूरी उसकी एक मुट्ठी में होगी, प्रलय के दिन तथा आकाश लपेटे हुए होंगे उसके हाथ[1] में। वह पवित्र तथा उच्च है उस शिर्क से, जो वे कर रहे हैं।
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1. ह़दीस में आता है कि एक यहूदी विद्वान नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया और कहाः हम अल्लाह के विषय में (अपनी धर्म पुस्तकों में) यह पाते हैं कि प्रलय के दिन आकाशों को एक उंगली, तथा भूमि को एक उंगली पर और पेड़ों को एक उंगली, जल तथा तरी को एक उंगली पर और समस्त उत्पत्ति को एक उंगली पर रख लेगा, तथा कहेगाः "मैं ही राजा हूँ।" यह सुन कर आप हँस पड़े। और इसी आयत को पढ़ा। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीसः 4812, 6519, 7382, 7413)
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1. ह़दीस में आता है कि एक यहूदी विद्वान नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया और कहाः हम अल्लाह के विषय में (अपनी धर्म पुस्तकों में) यह पाते हैं कि प्रलय के दिन आकाशों को एक उंगली, तथा भूमि को एक उंगली पर और पेड़ों को एक उंगली, जल तथा तरी को एक उंगली पर और समस्त उत्पत्ति को एक उंगली पर रख लेगा, तथा कहेगाः "मैं ही राजा हूँ।" यह सुन कर आप हँस पड़े। और इसी आयत को पढ़ा। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीसः 4812, 6519, 7382, 7413)
तफ़सीर
तथा बहुदेववादियों ने अल्लाह का सम्मान नहीं किया, जैसा सम्मान करना चाहिए था, जब उन्होंने अल्लाह की कमज़ोर एवं विवश मख़लूक़ को उसका साझी बनाया और उसकी क्षमता की अनदेखी की, जबकि उसकी क्षमता का एक प्रमाण यह है कि क़ियामत के दिन धरती अपने पर्वतों, पेड़ों तथा नहरों एवं समुद्रों समेत उसकी एक मुट्ठी में होगी, तथा सातों आकाश उसके दाहिने हाथ में लिपटे होंगे। इस शान का मालिक अल्लाह पवित्र तथा उच्च है उस शिर्क से, जो वे कर रहे हैं।
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