सूरह 39 · जुज़ 24
Az-Zumar · 39:65
وَلَقَدْ أُوحِيَ إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِنْ قَبْلِكَ لَئِنْ أَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
तथा वह़्यी की गई है आपकी ओर तथा उन (नबियों) की ओर, जो आपसे पूर्व (हुए) कि यदि आपने शिर्क किया, तो अवश्य व्यर्थ हो जायेगा आपका कर्म तथा आप हो जायेंगे[1] क्षतिग्रस्तों में से।
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1. इस आयत का भावार्थ यह है कि यदि मान लिया जाये कि आप के जीवन का अन्त शिर्क पर हुआ, और क्षमा याचना नहीं की तो आप के भी कर्म नष्ट हो जायेंगे। ह़ालाँकि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और सभी नबी शिर्क से पाक थे। इस लिये कि उन का संदेश ही एकेश्वरवाद और शिर्क का खण्डन है। फिर भी इस में संबोधित नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को किया गया है। और यह साधारण नियम बताया गया कि शिर्क के साथ अल्लाह के हाँ कोई कर्म स्वीकार्य नहीं। तथा ऐसे सभी कर्म निष्फल होंगे जो एकेश्वरवाद की आस्था पर आधारित न हों। चाहे वह नबी हो या उस का अनुयायी हो।
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1. इस आयत का भावार्थ यह है कि यदि मान लिया जाये कि आप के जीवन का अन्त शिर्क पर हुआ, और क्षमा याचना नहीं की तो आप के भी कर्म नष्ट हो जायेंगे। ह़ालाँकि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और सभी नबी शिर्क से पाक थे। इस लिये कि उन का संदेश ही एकेश्वरवाद और शिर्क का खण्डन है। फिर भी इस में संबोधित नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को किया गया है। और यह साधारण नियम बताया गया कि शिर्क के साथ अल्लाह के हाँ कोई कर्म स्वीकार्य नहीं। तथा ऐसे सभी कर्म निष्फल होंगे जो एकेश्वरवाद की आस्था पर आधारित न हों। चाहे वह नबी हो या उस का अनुयायी हो।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) अल्लाह ने आपकी ओर तथा आपसे पहले आने वाले रसूलों की आेर वह्य की है कि यदि तुमने अल्लाह के साथ किसी और की पूजा की, तो तुम्हारे सारे अच्छे कर्मों की नेकियाँ नष्ट हो जाएँगी और तुम घाटे में पड़ने वालों में से हो जाओगे। दुनिया में इस्लाम से वंचित होने का घाटा और आख़िरत में यातना में पड़ने का घाटा।
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