सूरह 39 · जुज़ 24

Az-Zumar · 39:38

وَلَئِنْ سَأَلْتَهُمْ مَنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۚ قُلْ أَفَرَأَيْتُمْ مَا تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ إِنْ أَرَادَنِيَ اللَّهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كَاشِفَاتُ ضُرِّهِ أَوْ أَرَادَنِي بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكَاتُ رَحْمَتِهِ ۚ قُلْ حَسْبِيَ اللَّهُ ۖ عَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُونَ

और यदि आप, उनसे प्रश्न करें कि किसने पैदा किया है आकाशों तथा धरती को? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कहिये कि तुम बताओ, जिसे तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, यदि अल्लाह मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो क्या ये उसकी हानि दूर कर सकता हैं? अथवा मेरे साथ दया करना चाहे, तो क्या ये रोक सकते हैं उसकी दया को? आप कह दें कि मुझे पर्याप्त है अल्लाह और उसीपर भरोसा करते हैं, भरोसा करने वाले।

तफ़सीर

और यदि आप (ऐ रसूल) इन बहूदेववादियों से प्रश्न करें कि आकाशों तथा धरती को किसने पैदा किया है? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने उन्हें पैदा किया है। आप उनकी विवशता को ज़ाहिर करने के लिए कहिए कि तुम मुझे उन मूर्तियों के बारे में बताओ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो कि यदि अल्लाह मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो क्या ये उसकी हानि को मुझसे दूर कर सकती हैं? या मेरे साथ दया करना चाहे, तो क्या ये उसकी दया को रोक सकती हैं? आप कह दें कि मेरे लिए केवल अल्लाह ही काफ़ी है। उसी पर मैं अपने तमाम मामलों में भरोसा करता हूँ। और केवल उसीपर भरोसा करने वाले भरोसा करते हैं।

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