सूरह 38 · जुज़ 23
Sad · 38:39
هَٰذَا عَطَاؤُنَا فَامْنُنْ أَوْ أَمْسِكْ بِغَيْرِ حِسَابٍ
ये हमारा प्रदान है। तो उपकार करो अथवा रोक लो, कोई ह़िसाब नहीं।
तफ़सीर
ऐ सुलैमान! यह हमारी बख़्शिश है, जो हमने तुम्हारी दुआ को स्वीकार करते हुए तुम्हें प्रदान की है। अब तुम जिसे चाहो, दो और जिसे चाहो, न दो। देने या न देने के मामले में तुमसे कोई हिसाब नहीं लिया जाएगा।
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