सूरह 38 · जुज़ 23
Sad · 38:1
ص ۚ وَالْقُرْآنِ ذِي الذِّكْرِ
साद। शपथ है शिक्षाप्रद क़ुर्आन की!
तफ़सीर
{सॉद} इस तरह के अक्षरों (हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत) के विषय में सूरतुल-बक़रा के आरंभ में बात गुज़र चुकी है। अल्लाह ने क़ुरआन की क़सम खाई है, जिसमें लोगों को उस चीज़ की याद दिलाना शामिल है, जो दुनिया और आखिरत में उनके लिए लाभदायक है। बात वैसी नहीं है, जैसा मुश्रिक लोग समझते हैं कि अल्लाह के साथ कोई भागीदार हैं।
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