सूरह 35 · जुज़ 22
Fatir · 35:14
إِنْ تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَاءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍ
यदि तुम उन्हें पुकारते हो, तो वे नहीं सुनते तुम्हारी पुकार को और यदि सुन भी लें, तो नहीं उत्तर दे सकते तुम्हें और प्रलय के दिन वे नकार देंगे तुम्हारे शिर्क (साझी बनाने) को और आपको कोई सूचना नहीं देगा सर्वसूचित जैसी।[1]
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1. इस आयत में प्रलय के दिन उन के पूज्य की दशा का वर्णन किया गया है कि यह प्रलय के दिन उन के शिर्क को अस्वीकार कर देंगे। और अपने पुजारियों से विरक्त होने की घोषणा कर देंगे। जिस से विद्वित हुआ कि अल्लाह का कोई साझी नहीं है। और जिन को मुश्रिकों ने साझी बना रखा है वह सब धोखा है।
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1. इस आयत में प्रलय के दिन उन के पूज्य की दशा का वर्णन किया गया है कि यह प्रलय के दिन उन के शिर्क को अस्वीकार कर देंगे। और अपने पुजारियों से विरक्त होने की घोषणा कर देंगे। जिस से विद्वित हुआ कि अल्लाह का कोई साझी नहीं है। और जिन को मुश्रिकों ने साझी बना रखा है वह सब धोखा है।
तफ़सीर
यदि तुम अपने पूज्यों को पुकारो, तो वे तुम्हारी पुकार नहीं सुनेंगे। क्योंकि वे निर्जीव वस्तुएँ हैं, जिनमें न जीवन है और न सुनने की शक्ति। और यदि (मान लिया जाए कि) वे तुम्हारी पुकार सुन ही लें, तो वे तुम्हारी पुकार का जवाब नहीं दे सकते। और क़ियामत के दिन वे तुम्हारे शिर्क एवं उपासना से पल्ला झाड़ लेंगे। अतः (ऐ रसूल!) आपको अल्लाह से अधिक सच्ची सूचना कोई नहीं दे सकता।
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