सूरह 34 · जुज़ 22
Saba · 34:45
وَكَذَّبَ الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ وَمَا بَلَغُوا مِعْشَارَ مَا آتَيْنَاهُمْ فَكَذَّبُوا رُسُلِي ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
तथा झुठलाया था इनसे पूर्व के लोगों ने और नहीं पहुँचे ये उसके दसवें भाग को भी, जो हमने प्रदान किया था उन्हें। तो उन्होंने झुठला दिया मेरे रसूलों को, अन्ततः, मेरा इन्कार कैसा रहा?[1]
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1. अर्थात आद और समूद ने। अतः मेरे इन्कार के दुष्परिणाम अर्थात उन के विनाश से इन्हें शिक्षा लेनी चाहिये। जो धन-बल तथा शक्ति में इन से अधिक थे।
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1. अर्थात आद और समूद ने। अतः मेरे इन्कार के दुष्परिणाम अर्थात उन के विनाश से इन्हें शिक्षा लेनी चाहिये। जो धन-बल तथा शक्ति में इन से अधिक थे।
तफ़सीर
तथा पिछले समुदायों जैसे आद, समूद और लूत अलैहिस्सलाम की जाति ने भी झुठलाया था। जबकि आपकी जाति के बहुदेववादी लोग, शक्ति, अजेयता, धन और संख्या बल में पिछले समुदायों के दसवें भाग तक भी नहीं पहुँचे हैं। चुनाँचे उनमें से प्रत्येक जाति ने अपने रसूल को झुठलाया, तो उनके धन, शक्ति और संख्या ने उन्हें कोई लाभ नहीं दिया और अंततः उनपर मेरा अज़ाब आकर रहा। तो (ऐ रसूल!) देखो कि मेरा उनका खंडन करना कैसा रहा और मेरा उन्हें दंडित करना कैसा रहा।
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