सूरह 34 · जुज़ 22

Saba · 34:38

وَالَّذِينَ يَسْعَوْنَ فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ

तथा जो प्रयास करते हैं हमारी आयतों में विवश करने के लिए,[1] तो वही यातना में ग्रस्त होंगे।
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1. अर्थात हमारी आयतों को नीचा दिखाने के लिये।

तफ़सीर

तथा जो काफ़िर, लोगों को हमारी आयतों से फेरने का अथक प्रयास करते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश में लगे रहते हैं, वे दुनिया में घाटा उठाने वाले हैं तथा आखिरत में यातना से ग्रस्त किए जाएँगे।

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