सूरह 34 · जुज़ 22
Saba · 34:12
وَلِسُلَيْمَانَ الرِّيحَ غُدُوُّهَا شَهْرٌ وَرَوَاحُهَا شَهْرٌ ۖ وَأَسَلْنَا لَهُ عَيْنَ الْقِطْرِ ۖ وَمِنَ الْجِنِّ مَنْ يَعْمَلُ بَيْنَ يَدَيْهِ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَمَنْ يَزِغْ مِنْهُمْ عَنْ أَمْرِنَا نُذِقْهُ مِنْ عَذَابِ السَّعِيرِ
तथा ( हमने वश में कर दिया) सुलैमान[1] के लिए वायु को। उसका प्रातः चलना एक महीने का तथा संध्या का चलना एक महीने का[2] होता था तथा हमने बहा दिये उसके लिए तांबे के स्रोत तथा कुछ जिन्न कार्यरत थे उसके समक्ष, उसके पालनहार की अनुमति से तथा उनमें से जो फिरेगा हमारे आदेश से, तो हम चखायेंगे[3] उसे भड़कती अग्नि की यातना।
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1. सुलैमान (अलैहिस्सलाम) दावूद (अलैहिस्सलाम) के पुत्र तथा नबी थे। 2. सुलैमान (अलैहिस्सलाम) अपने राज्य के अधिकारियों के साथ सिंहासन पर आसीन हो जाते। और उन के आदेश से वायु उसे इतनी तीव्र गति से उड़ा ले जाती कि आधे दिन में एक महीने की यात्रा पूरी कर लेते। इस प्रकार प्रातः संध्या मिला कर दो महीने की यात्रा पूरी हो जाती। (देखियेः इब्ने कसीर)
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1. सुलैमान (अलैहिस्सलाम) दावूद (अलैहिस्सलाम) के पुत्र तथा नबी थे। 2. सुलैमान (अलैहिस्सलाम) अपने राज्य के अधिकारियों के साथ सिंहासन पर आसीन हो जाते। और उन के आदेश से वायु उसे इतनी तीव्र गति से उड़ा ले जाती कि आधे दिन में एक महीने की यात्रा पूरी कर लेते। इस प्रकार प्रातः संध्या मिला कर दो महीने की यात्रा पूरी हो जाती। (देखियेः इब्ने कसीर)
तफ़सीर
तथा हमने सुलैमान बिन दाऊद अलैहिमस्सलाम के लिए हवा को वशीभूत कर दिया। वह प्रातः काल एक महीने की दूरी तय करती थी और सायंकाल एक महीने की दूरी तय करती थी। और हमने उनके लिए ताँबे का स्रोत बहा दिया, ताकि वह ताँबे से जो चाहें, बनाएँ। और हमने कुछ जिन्नों को भी उनके वश में कर दिया, जो अपने पालनहार के आदेश से उनके आगे काम करते थे। और जिन्नों में से जो भी मेरे आदेश से मुँह फेरेगा, उसे हम दहकती आग की यातना चखाएँगे।
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