सूरह 32 · जुज़ 21

As-Sajdah · 32:23

وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَلَا تَكُنْ فِي مِرْيَةٍ مِنْ لِقَائِهِ ۖ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِبَنِي إِسْرَائِيلَ

तथा हमने मूसा को प्रदान की (तौरात) तो आप न हों किसी संदेह में, उस[1] से मिलने में तथा बनाया हमने उसे (तौरात को) मार्गदर्शन इस्राईल की संतान के लिए।
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1. इस में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के मेराज की रात्रि में मूसा (अलैहिस्सलाम) से मिलने की ओर संकेत है। जिस में मूसा (अलैहिस्सलाम) ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अल्लाह से पचास को नमाज़ों पाँच कराने का प्रामर्श दिया था। (सह़ीह़ बुख़ारीः3207, मुस्लिमः164)

तफ़सीर

और हमने मूसा को तौरात प्रदान की। तो (ऐ रसूल) आप इसरा और मेराज की रात मूसा से मिलने के बारे में किसी संदेह में न रहें। और हमने मूसा पर उतारी गई पुस्तक को बनी इसराईल के लिए गुमराही से मार्गदर्शक बनाया है।

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