सूरह 31 · जुज़ 21
Luqman · 31:33
يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ وَاخْشَوْا يَوْمًا لَا يَجْزِي وَالِدٌ عَنْ وَلَدِهِ وَلَا مَوْلُودٌ هُوَ جَازٍ عَنْ وَالِدِهِ شَيْئًا ۚ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُمْ بِاللَّهِ الْغَرُورُ
हे लोगो! डरो अपने पालनहार से तथा भय करो उस दिन का, जिस दिन नहीं काम आयेगा कोई पिता अपनी संतान के और न कोई पुत्र काम आने वाला होगा, अपने पिता के कुछ[1] भी। निश्चय अल्लाह का वचन सत्य है। अतः, तुम्हें कदापि धोखे में न रखे सांसारिक जीवन और न धोखे में रखे अल्लाह से प्रवंचक (शैतान)।
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1. अर्थात परलोक की यातना संसारिक दण्ड के समान नहीं होगी कि कोई किसी की सहायता से दण्ड मुक्त हो जाये।
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1. अर्थात परलोक की यातना संसारिक दण्ड के समान नहीं होगी कि कोई किसी की सहायता से दण्ड मुक्त हो जाये।
तफ़सीर
ऐ लोगो! अपने रब से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर, डरो, और उस दिन की यातना से डरो, जिस दिन पिता न अपनी संतान के कुछ काम आएगा और न संतान अपने पिता के कुछ काम आएगी। निश्चय अल्लाह का क़ियामत के दिन बदला देने का वादा पक्का है और अपरिहार्य रूप से घटित होने वाला है। अतः दुनिया का जीवन और उसकी वासनाएँ और विचलित करने वाली चीज़ें तुम्हें धोखे में न डालें, तथा अल्लाह के तुम्हारे प्रति सहनशीलता से काम लेने और तुमसे यातना को विलंबित करने के कारण शैतान तुम्हें धोखा न देने पाए।
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