सूरह 31 · जुज़ 21
Luqman · 31:25
وَلَئِنْ سَأَلْتَهُمْ مَنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۚ قُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और यदि आप उनसे प्रश्न करें कि किसने उत्पन्न किया है आकाशों तथा धरती को? तो अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कह दें कि सब प्रशंसा अल्लाह के लिए[1] है, बल्कि उनमें अधिक्तर ज्ञान नहीं रखते।
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1. कि उन्हों ने सत्य को स्वीकार कर लिया।
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1. कि उन्हों ने सत्य को स्वीकार कर लिया।
तफ़सीर
यदि (ऐ रसूल) आप इन मुश्रिकों से पूछें : आकाशों को किसने पैदा किया और धरती किसने बनाई? तो वे अवश्य यही कहेंगे : उन्हें अल्लाह ने पैदा किया है। उनसे कह दें : हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने तुम्हारे ऊपर तर्क को प्रकट कर दिया। लेकिन उनमें से अधिकतर लोग अपनी अज्ञानता के कारण यह नहीं जानते कि प्रशंसा के पात्र कौन है।
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