सूरह 31 · जुज़ 21

O my son, do not associate with Allah · Luqman 31:13

وَإِذْ قَالَ لُقْمَانُ لِابْنِهِ وَهُوَ يَعِظُهُ يَا بُنَيَّ لَا تُشْرِكْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ

तथा (याद करो) जब लुक़मान ने कहा अपने पुत्र से, जब वह समझा रहा था उसेः हे मेरे पुत्र! साझी मत बना अल्लाह का, वास्तव में, शिर्क (मिश्रणवाद) बड़ा घोर अत्याचार[1] है।
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1. ह़दीस में है कि घोर पापों में से, अल्लाह के साथ शिर्क करना, माँ-बाप के साथ बुरा व्यवहार, जान मारना तथा झूठी शपथ लेना है। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्याः7257)

तफ़सीर

और (ऐ रसूल) याद करें, जब लुक़मान ने अपने बेटे से, उसे अच्छे कार्य में रुचि दिलाते हुए और बुरे कार्य से सावधान करते हुए कहा : ऐ मेरे बेटे! अल्लाह के साथ उसके अलावा की इबादत न कर। अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य की इबादत करना, अपने आप पर बहुत बड़ा अत्याचार है। क्योंकि यह सबसे बड़ा गुनाह है और इसके नतीजे में इनसान सदा जहन्नम में रहने का हक़दार बन जाता है।

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