सूरह 31 · जुज़ 21
Luqman · 31:10
خَلَقَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَنْ تَمِيدَ بِكُمْ وَبَثَّ فِيهَا مِنْ كُلِّ دَابَّةٍ ۚ وَأَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنْبَتْنَا فِيهَا مِنْ كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ
उसने उत्पन्न किया है आकाशों को बिना किसी स्तस्भ के, जिन्हें तुम देख रहे हो और बना दिये धरती में पर्वत, ताकि डोल न जाये तुम्हें लेकर और फैला दिये उनमें हर प्रकार के जीव तथा हमने उतारा आकाश से जल, फिर हमने उगाये उसमें प्रत्येक प्रकार के सुन्दर जोड़।
तफ़सीर
पवित्र अल्लाह ने बिना खंभों के ऊपर उठे हुए आकाश पैदा किए, और धरती में अचल पहाड़ गाड़ दिए, ताकि वह तुम्हें लेकर हिलने-डुलने न लगे और धरती के ऊपर सभी प्रकार के जानवर फैला दिए। तथा हमने आकाश से बारिश का पानी उतारा। फिर हमने धरती के ऊपर हर तरह की खुश-मंज़र चीज़ें उगाईं, जिनसे इनसान और जानवर लाभ प्राप्त करते हैं।
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